Thursday, 24 September 2015

ऑटिज्म

क्या है ऑटिज्म

ऑटिज्म को कई नामों से जाना जाता है जैसे स्वलीनता, मानसिकरोग, स्वपरायणता। हर साल 2 अप्रैल को ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया जाता है। लेकिन सवाल ये उठता है कि ऑटिज्म है क्या। दरअसल ऑटिज्म मस्तिष्‍क के विकास में बाधाडालने और विकासके दौरान होने वाला विकार है। ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति बाहरी दुनिया से अनजान अपनी ही दुनिया में खोया रहता है। क्या आप जानते है व्यक्ति के विकास संबंधी समस्याओं में ऑटिज्म तीसरे स्थान पर है यानी व्यक्ति के विकास में बाधा पहुंचाने वाले मुख्य कारणों में ऑटिज्म भी जिम्मेदार है। आइए जानें ऑटिज्म जागरुकता दिवस पर ऑटिज्म संबंधी कुछ और बातें।

ऑटिज्म के लक्षण
  1. ऑटिज्म के दौरान व्यक्ति को कई समस्याएं हो सकती है, यहां तक कि व्यक्ति मानसिक रुप से विकलांग हो सकता है।
  2. ऑटिज्म के रोगी को मिर्गि के दौरे भी पड सकते है।
  3. कई बार ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति को बोलते और सुनने में समस्याएं आती है।
  4. ऑटिज्म जब गंभीर रुप से होता है तो इसे ऑटिस्टिक डिस्‍ऑर्डर के नाम से जाना है। लेकिन जब ऑटिज्म के लक्षणकम प्रभावी होते है तो इसे ऑटिज्म स्पेक्‍ट्रम डिस्‍ऑर्डर (ASD) के नाम से जाना जाता है. एएसडी के भीतर एस्पर्जर सिंड्रोम शामिल है।
ऑटिज्म का प्रभाव
  1. ऑटिज्म पूरी दुनिया में फैला हुआ है. क्या आप जानते है वर्ष 2010 तक विश्‍व में तकरीबन 7 करोड लोग ऑटिज्म से प्रभावित थे।
  2. इतना ही नही दुनियाभर में ऑटिज्म प्रभावित रोगियों की संख्या मधुमेह, कैंसर और एड्स के रोगियों की संख्या मिलाकर भी इससे अधिक है।
  3. ऑटिज्म प्रभावित रोगियों में डाउन सिंड्रोम की संख्या अपेक्षा से भी अधिक है।
  4. आप ऑटिज्म पीडितों की संख्या का इस बात से अंदाजा लगा सकते है कि दुनियाभर में प्रति दस हजार में से 20  व्यक्ति इस रोगसे प्रभावित होते है।
  5. लेकिन कई शोधोंमें यह भी बात सामने आई है कि ऑटिज्म महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में अधिक देखने को मिला है. यानी 100  में से 80 फीसदी पुरुष इस बीमारी से प्रभावित है।
बच्चों में ऑटिज्म की पहचान

बच्चों में ऑटिज्म को बहुत आसानीसे पहचाना जा सकता है. बच्चों में ऑटिज्म के कुछ लक्षण इस प्रकार है।

  1. कभी-कभी किसी भी बात का जवाब नहीं देते या फिर बात को सुनकर अनुसुना कर देते है.। कई बार आवाज लगाने पर भी जवाब नहीं देते।
  2. किसी दूसरे व्यक्ति की आंखों में आंखे डालकर बात करने से घबराते है।
  3. अकेले रहना अधिक पसंद करते है, ऐसे में बच्चों के साथ ग्रुप में खेलना भी इन्हें पसंद नहीं होता।
  4. बात करते हुए अपने हाथों का इस्तेमाल नहीं करते या फिर अंगुलियों से किसीतरह का कोई संकेत नहीं करते।
  5. बदलाव इन्हें पसंद नहीं होता’रोजाना एक जैसा काम करने में इन्हें मजा आता है।
  6. यदि कोई बात सामान्य तरीके से समझाते है तो इस पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। 
  7. बार-बार एक ही तरह के खेल खेलना इन्हें पसंद होता है।
  8. बहुत अधिक बेचैन होना, बहुत अधिक निष्क्रिय होना या फिर बहुताधिक स्क्रिय होना। कोई भी काम एक्‍सट्रीम लेवल पर करते है।
  9. ये बहुत अधिक व्यवहार कुशल नहीं होते और बचपन में ही ऐसे बच्चों में ये लक्षण उभरने लगते है। बच्चों में ऑटिज्म को पहचानने के लिए ३ साल की उम्र ही काफी है।
  10. इन बच्चों का विकास सामान्य बच्चोंकी तरहनाहोकर बहुत धीमा होता है।
ऑटिज्म होने के कारण

अभी तक शोधों में इस बात का पता नहीं चलपाया है कि ऑटिज्म होने का मुख्य कारण क्या है। यह कई कारणों से हो सकता है।
  1. जन्म संबंधी दोष होना।
  2. बच्चे के जन्म से पहले और बाद में जरुरी टीके ना लगवाना।
  3. गर्भावस्थाके दौरान मां कोई गंभीर बीमारी होना।
  4. दिमाग की गतिविधियों में असामान्यता होना।
  5. दिमागके रसायनों में असामान्यता होना।
  6. बच्चे का समय से पहले जन्म या बच्चे का गर्भ में ठीक से विकास ना होना।
लडकियों के मुकाबले लडकों की इस बीमारी की चपेट में आने की ज्यादा संभावना होती है.। इस बीमारी को पहचानने का कोई निश्‍चित तरीका नहीं है, हालांकि जल्दी इसका निदान हो जाने की स्थिति मेंसुधार लाने के लिए कुछ किया जा सकता है। यह बीमारी दुनिया भर में पाईं जाती है और इसका गंभीर प्रभाव बच्चों, परिवारों, समुदाय और समाज सभी पर पडता है।

No comments:

Post a Comment