- ऑटिज्म के मरीज अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं।
- रोगियों को जानने के लिए उनसे प्यार से बात करें।
- रोगियों को नयी-नयी चीजें सीखने के लिए प्रेरित करें।
- अपनी जरूरत के बारे में उन्हें खुद बोलना सिखाएं।
ऑटिज्म से ग्रस्त रोगियों का शारीरिक विकास तो होता है, लेकिन मानसिक विकास धीमा हो जाता हैा इससे पीडित लोग अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं। उन्हें बोलने में समस्या होती है। वे हर किसी से खुल नहीं पाते हैं इसके अलावा कभी-कभी वे इतने अक्रामक हो जाते हैं कि खुद को ही चोट पहुंचा लेते हैं।
ऑटिज्म मस्तिष्क की उस प्रक्रिया पर असर डालता है, जिसका काम भावों, संचार और शरीर की जलचल को नियंत्रित करता होता है। कुछ ऑटिस्टिक बच्चों में हाथ और मस्तिष्क का बडा आकार भी देखने को मिलता है। ऑटिज्म सिंड्रोम डिसऑडर से प्रभावित बच्चों में कुछ अन्य जुडी हुई स्थितियां भी देखने में मिलती हैं। ऑटिज्म के रोगियों को उपचार देने से पहले चिकित्सक यह जानने की कोशिश करते हैं कि बच्चे की वास्तविक समस्या क्या है।
ऑटिज्म के रोगियों का जीवन काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में उन्हें प्यार व दुलार की काफी जरूरत होती है। उन्हें अपने आसपास ऐसे लोगों की जरूरत हाेती है जो उन्हें समझे और ऐसी स्थिति से बाहर अाने में मदद करें। ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चे को ऐसी स्थिति में स्वीकार नहीं कर पाते हैं और वे बच्चे की अनदेखी व उससे दूरी बनाने लगते हैं जो कि बच्चे के लिए बहुत नुकसानदेह है।
आइए जानते हैं ऑटिज्म में ध्यान रखने वाली बातों के बारे में -
- बच्चों को दुत्कारें नहीं, बल्कि उनकी ओर विशेष ध्यान दें ।
- खेल-खेल में बच्चों के साथ नए शब्दों का प्रयोग करें।
- शारीरिक खेल गतिविधियों के लिए ऑटिज्म रोगियों को प्रोत्साहित करें।
- रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को जोडकर बोलना सिखाएं ।
- बच्चों को तनाव मुक्त जगहों पर लेकर जाएं।
- बच्चों को खिलौनों के साथ खेलने का सही तरीका दिखाएं।
- धीरे-धीरे खेल में लोगों की संख्या को बढाते जाएं।
- रोगी से छोटे-छोटे वाक्यों में बात करें। इसके अलावा साधारण वाक्यों का प्रयोग करें जिससे रोगी उसे समझ सके।
- रोगियों पहले समझना फिर बोलना सिखाएं।
- यदि बच्चा बोल पा रहा है तो उसे प्रोत्साहित करें और बार-बार उसे बोलने के लिए प्रेरित करें।
- बच्चे को अपनी जरूरतों को बोलने का मौका दें।
- यदि बच्चा बिलकुल बोल नहीं पाए तो उसे तस्वीर की तरफ इशार करके अपनी जरूरतों के बारे में बोलना सीखाएं।
- बच्चे को घर के अलावा अन्य लोगों से नियमित रूप से मिलने का मौका दें।
- बच्चे को तनवा मुक्त स्थानों जैसे पार्क आदि में ले जाएं।
- अन्य लोगों को बच्चे से बात करने के लिए प्रेरित करें।
- यदि बच्चा कोई एक व्यवहार बार-बार करता है तो उसे रोकने के लिए उसे किसी दूसरे काम में व्यस्त रखें।
- गलत व्यवहार दोहराने पर बच्चों से कुछ ऐसा करवाएं जो उसे पसंद ना हो।
- यदि बच्चा कुछ देर गलत व्यवहार न करें तो उसे तुरंत प्रोत्साहित करें।
- प्रोत्साहन के लिए रंग-बिरंगी, चमकीली तथा ध्यान खींचने वाली चीजों का इस्तेमाल करें।
- बच्चों को अपनी शक्ति को इस्तेमाल करने के लिए उसे शारीरिक खेल के लिए प्रोत्साहित करें।
- अगर परेशानी ज्यादा हो तो मनोचिकित्सक द्वारा दी गई दवाओं का प्रयोग करें।
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