Thursday, 24 September 2015

पीजीआई ने पहली बार ढूंढ़ा ऑटिज्म के इलाज का तरीका

प्रेग्नेंसी के दौरान ही महिलाओं को अगर कुछ मेडिसन दी जाएं तो हर साल हजारों बच्चों को ऑटिज्म की बीमारी से बचाया जा सकता है। अभी बिहेवियर थैरेपी से ही ऐसे बच्चों का इलाज हो रहा था। पीजीआई के फार्माकोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. बिकेश मेधी ने मेडिसन के जरिए बीमारी को ठीक करने का रास्ता निकाल लिया है। डॉ. मेधी द्वारा तैयार मॉडल पर ऐसे बच्चों को दी जाने वाली मेडिसन के टेस्ट किए गए। इन टेस्ट के रिजल्ट भी पॉजिटिव आए हैं। देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में पहली बार ये मॉडल तैयार किया गया है। डॉ. मेधी जल्द ही इस मॉडल को पेटेंट करवाने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। डॉ. मेधी को इसी मॉडल को तैयार करने और अभी तक किए गए काम के लिए देश के सबसे बड़े फार्माकोलॉजी अवाॅर्ड के लिए भी चुना गया है। 28 से 30 दिसंबर तक गुवाहाटी में यह अवाॅर्ड दिया जाएगा। डॉ. मेधी कहते हैं कि पीजीआई में भी ऐसे बच्चों का इलाज चल रहा है। लेकिन हमने इस बीमारी के कारणों को दूर करने के लिए ऐसी मेडिसन ढूंढने का प्रयास शुरू किया, जो इस बीमारी को दूर कर सके। लेकिन इन मेडिसन के टेस्ट के लिए कोई इक्यूपमेंट नहीं था। इसलिए एक्सपेरिमेंटल मॉडल ऑन ऑटिज्म तैयार किया गया। 

डॉ. बिकेश मेधी 

ऑटिज्म एक न्यूरो डेवलपमेंट डिस्ऑर्डर है। कुछ महिलाओं में आयरन या दूसरे मैटल की मात्रा पहले से ही अधिक होती है। लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान दी जाने मेडिसन में ये मैटल या आयरन दिए जाने से महिला के शरीर में इनकी मात्रा बढ़ जाती है। इससे बच्चे को प्रॉब्लम होती है। पेस्टीसाइड या फिर बच्चे के जन्म के बाद होने वाली वेक्सीनेशन से भी ये बीमारी शुरू होती है। 

कुछ समझ नहीं पाते 

येबीमारी होने पर बच्चे अासपास हो रही घटनाओं को देख ताे पाते हैं लेकिन समझ नहीं पाते कि ये क्या है। ब्रेन को सही तरह से कम्युनिकेशन होने से ये बच्चा एक तरह से लोगों से कटा रहता है। ऐसे बच्चे कई बातें एक्सप्लेन भी नहीं कर पाते। ऐसे बच्चों को बिहेवियर थैरेपी के जरिए कुछ हद तक ठीक करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। 

डॉ. मेधी बताते हैं कि इस बीमारी का पता बच्चों के दो से अढ़ाई साल की उम्र का होने पर चलता है। एक दिन में पैदा होने वाले 200 बच्चों में से एक को यह बीमारी होती है। इस समय देश में इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की संख्या 40 लाख से ज्यादा है। 

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