ऑटिज्म यानी बच्चे का मंदबुद्धि होना एक गंभीर बीमारी माना जाता है। इसके रोगी बच्चों के लक्षण एक जैसे नहीं होते इसलिए इसे एक बीमारी मानने के स्थान पर ऑटिज्म स्पैक्ट्रम डिसआर्डर भी कहा जाता है। इसके लक्षणों में विभिन्न प्रकार की शारीरिक तथा मानसिक अपंगता, शारीरिक विकास का ठीक न होना, अपने आप में मस्त रहना, बिना कारण इधर-उधर भागना, न बोलना या बहुत कम बोलना, चीजों को बार-बार सूंघना, चीजों को तोडऩा-फोडऩा, बिना अर्थ हंसना या रोना, सीखने और पढऩे में कमजोर होना इत्यादि। इस रोग संबंधी कई वर्षों की खोज के बाद यह परिणाम निकला कि ऑटिज्म के 95 प्रतिशत कारण दिमागी संरचना में गड़बड़ी नहीं बल्कि हमारे शरीर के अंदरूनी रसायनों में असंतुलन है। बीमारी के कारणों में 80 प्रतिशत योगदान वातावरण की गड़बडिय़ों का है। इसी कारण बच्चों के शरीर के अंदर रसायनों का संतुलन बिगड़ता है और बच्चे का दिमाग और शरीर के अन्य अंग ठीक ढंग से काम नहीं करते। सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत बच्चों में ही ऑटिज्म का कारण जीन्स की गड़बड़ी होता है। आज के वातावरण में मौजूद विषैले पदार्थ माता-पिता की प्रजनन कोशिकाओं तथा मां के पेट में पल रहे भ्रूण पर दुष्प्रभाव डालते हैं जिस कारण बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। वह बार-बार बीमार होने लगता है, उसका पेट खराब रहता है, उसे दस्त और उल्टियां आती हैं, खांसी-जुकाम होता है, न्यूमोनिया तथा कई अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं। इन बीमारियों को ठीक करने के लिए तेज एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसका सबसे बुरा असर पाचन-प्रणाली पर पड़ता है। बीमारी पैदा करने वाले रोगाणु विषैले रसायन बनाते हैं जो दिमाग समेत शरीर के सभी अंगों के कामों में खलल डालते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर के अंदर रसायनों का असंतुलन ही ऑटिज्म या मंदबुद्धि रोग का कारण बनता है। बहुत से पोषक तत्वों की कमी के कारण भी ऑटिज्म के लक्षण पैदा होते हैं। उदाहरण के तौर पर विटामिन बी-1, बी-6, बी-12, फोलिक एसिड, ग्लूटाथियान, कुछ प्रकार के एमिनो एसिड्स तथा एंटी ऑक्सीडैंट्स की कमी के कारण बच्चे ऑटिज्म का शिकार हो जाते हैं। इस बीमारी के इलाज के लिए डाक्टरों ने कुछ वैकल्पिक प्रणालियों का इस्तेमाल किया है ताकि अच्छे परिणाम मिल सकें। इन प्रणालियों में एलोपैथी के अतिरिक्त होम्योपैथी तथा अन्य प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है और इनसे संबंधी कई संगठन भी कार्यरत हैं।
No comments:
Post a Comment