Thursday, 17 September 2015

संचार से ऑटिस्टिक बच्‍चों की मदद

ऑटिज्‍म ऐसा विकार है जो कि बच्‍चे के बात करने और समझने की कला को प्रभावित करता है। चिकित्‍सक ऑटिज्‍म को एक ऐसे व्‍यापक विकासात्‍मक विकार के रूप में वर्गीकृत करते हैं जिसका अर्थ है कि बच्‍चा सामान्‍य बच्‍चों की तरह जीवन के पहलुओं को नहीं समझ सकता। ऐसे बच्‍चों की मुख्‍य समस्‍या होती है संचार की। ऑटिस्टिक बच्‍चे ना सिर्फ अपनी भावनाएं दूसरों पर व्‍यक्‍त करने में असमर्थ होते हैं बल्कि वो दूसरों की बातें समझने में भी असमर्थ होते हैं। इन्‍हीं कारणों से वे पढाई में दूसरे बच्‍चों से पीछे रह जाते हैं।

ऑटिस्टिक बच्‍चों में कुछ विशिष्‍ट लक्षण होते हैं जैसे कि लगातार एक ही प्रकार का काम करना या प्रतिदिन के कार्य में किसी प्रकार के बदलाव को अस्‍वीकार करना। उन्‍हें मौखिक और गैर मा‍ैखिक संचार दोनों में ही समस्‍या आती है।

ऐसे बच्‍चे बिलकुल नहीं बोलते हैं और सिर्फ तेज आवाज पर ही प्रतिक्रिया देते हैं। कुछ ऑटिस्टिक बच्‍चे संकेतों को भी नहीं समझ पाते ।

बहुत से ऑटिस्टिक बच्‍चे थोडा बहुत बोल लेते हैं लेकिन वो सामान्‍य बच्‍चों की तरह नहीं पढ सकते। जैसे कि वो कुछ विशेष क्षेत्राें में बोल पाते हैं, लेकिन सभी में नहीं। कुछ ऑटिस्टिक बच्‍चों की यादाश्‍त बहुत अच्‍छी होती है अगर उन्‍होंने कोई जानकारी सुनी है या कोई घटना देखी है, तो उन्‍हें लम्‍बे समय तक याद रहती है। कुछ में बहुत ही महान संगीत प्रतिभा होती है और कुछ गणितीय गणना करने में बहुत तेज होते हैं। आंकडों से ऐसा पता चला है कि ऑटिज्‍म से प्रभावित लगभग 10 प्रतिशत बच्‍चों में संगीत और गणित को समझने की अधिक क्षमता होती है।

अधिकतर चिकित्‍सक जो कि ऑटिस्टिक बच्‍चों की देखरेख करते हैं वो ऐसी सलाह देते हैं कि ऑटिस्टिक बच्‍चों की जितनी जल्‍दी हो सके स्‍पीच थेरेपी की जानी चाहिए। इससे बच्‍चे दूसरे लोगों को समझने में और बातें करने में धीरे-धीरे समर्थ होने लगते हैं।

अाजकल, स्‍पीच लैंग्‍वेज पैथालाजिस्‍ट या भाषण चिकित्‍सक जो कि भाषा से सम्‍बन्‍धी समस्‍याओं के विशेषज्ञ हैं, जो ऑटिज्‍म की चिकित्‍सा करते हैं। चिकित्‍सा के सभी चरण में स्‍पीच लैंग्‍वेज चिकित्‍सा सामान्‍यत: पविार, स्‍कूल और शिक्षक का सहयोग भी लेता है। बहुत से उपकरण जैसे कि इलेक्‍ट्रानिक टाकर, चित्र बोर्ड और शब्‍दों के इस्‍तेमाल से ऐसे बच्‍चों को समझने में अासानी होती है।

भाषण चिकित्‍सा से ना केवल बच्‍चे की भाषा का कौशल विकसिकत होता है बल्कि इससे बच्‍चे आसपास में रहने वालों से संबंध भी स्‍थापित कर पाते हैं, जैसा कि ऑटिस्टिक बच्‍चों को करने में समस्‍या आती है। अधिकतर चिकित्‍सक ऐसी सलाह देते हैं कि ऑटिस्टिक बच्‍चों में जितनी जल्‍दी हो सके स्‍पीच थेरेपी शुरू कर देनी चाहिए। सामान्‍यत: ऑटिज्‍म का पता 3 साल की उम्र से पहले लगता है। अधिकतर ऑटिस्टिक बच्‍चे बोलने में अक्षम हाेते हैं, लेकिन थेरेपी के शुरूआती दिनों से ही वो सामने वाले के सवालों पर कुछ प्रतिक्रिया करते हैं। शोधों से ऐसा पता चला है कि वो ऑटिस्टिक लोग जिनमें कि सुधार पाया गया है वो अधिक समय से स्‍पीच थेरेपी ले रहे हाेते हैं।

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