Thursday, 24 September 2015

समय पर ध्यान दें लाइलाज नहीं है ऑटिज्म

चार साल का गुड्डू अब तक ठीक से बोल नहीं पाता। जब इस समस्या को लेकर गुड्डू के अभिभावक ईएनटी विशेषज्ञ के पास गए तो पता चला कि वह ऑटिज्म का शिकार है। क्या है ऑटिज्म, बता रही हैं अमृता प्रकाश

जब कोई बच्चा असामान्य रूप से बहुत ज्यादा जिद करता है, अपनी हरकतों को बार-बार दोहराता है, जल्दी कुछ सीखता नहीं या चीजों को पटकता, तोड़ता-फोड़ता है तो हम सोचते हैं कि वह शैतान हो गया है और हम उसे डांट-फटकार कर शांत हो जाते हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। उसकी हरकतों पर सावधानीपूर्वक ध्यान देते हुए डॉंक्टरों से सलाह लेने की जरूरत होती है, क्योंकि आपका बच्चा ऑटिस्टिक भी हो सकता है।

ऑटिस्टिक बच्चे के सामने यूं भी कम परेशानियां नहीं होतीं, उस पर इस मामले में माता-पिता का लापरवाही बरतना, सच को स्वीकार न करना या फिर बच्चे से दूरी बना लेना उसकी समस्या को और भी गंभीर बना देता है।

क्या है ऑटिज्म
ऑटिज्म एक ऐसा रोग है, जिसमें रोगी बचपन से ही परिवार, समाज व बाहरी माहौल से जुड़ने की क्षमताओं को गंवा देता है। यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है, जो बातचीत और दूसरे लोगों से व्यवहार करने की क्षमता को सीमित कर देता है। इसे ऑटिस्टिक स्पैक्ट्रम डिसॉर्डर कहा जाता है, क्योंकि प्रत्येक बच्चे में इसके अलग-अलग लक्षण देखने को मिलते हैं। इनमें से कुछ बच्चे बहुत जीनियस होते हैं या उनका आईक्यू सामान्य बच्चों की तरह होता है, पर उन्हें बोलने और सामाजिक व्यवहार में परेशानी होती है। कुछ ऐसे भी होते हैं, जिन्हें सीखने-समझने में परेशानी होती है और वे बार-बार एक ही तरह का व्यवहार करते हैं। चूंकि ऑटिस्टिक बच्चों में सहानुभूति का अभाव होता है, इसलिए वे दूसरों तक अपनी भावनाएं नहीं पहुंचा पाते या उनके हाव-भाव व संकेतों को नहीं समझ पाते। कुछ बच्चे एक ही तरह का व्यवहार बार-बार करने के कारण थोड़े से बदलाव से ही हाइपर हो जाते हैं।

क्या हैं लक्षण
बोलचाल व शाब्दिक भाषा में काफी कमी आ जाती है। पीडित बच्चे सही समय पर सही बात नहीं कहते और अपनी जरूरतों को भाषा या शब्दों का प्रयोग करके नहीं कह पाते। यदि बच्चे को भोजन करना है तो वह यह नहीं बोलता कि मुझे खाना दो। इसके विपरीत वह मां का हाथ पकड़ कर रसोई तक ले जाता है और मां अपने आप बात को समझ कर बच्चे को खाना दे देती है। खिलौनों, चाबी, रिमोट आदि को बार-बार पटकना, सुने-सुनाए व खुद के ईजाद किए शब्दों को बार-बार बोलते रहना, अपनी परछाईं से खेलते रहना उनकी आदत बन जाता है।

क्या हैं इसके कारण
ऑटिज्म के वास्तविक कारणों के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है। शोधों की बात करें तो कहा जाता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान मां में थाइरॉएड की कमी भी इसका कारण हो सकती है।

(मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के मनोचिकित्सक डॉं. ओवैस अकरम फारूकी से बातचीत पर आधारित।)

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